Sunday, November 27, 2022

Byjus Forced To Resign, Treated Like Robots: Fired Employees Said – Byjus ने इस्तीफा देने के लिए किया बाध्य, रोबोट की तरह करते थे ट्रीट : निकाले गए कर्मचारी बोले


कर्मचारियों को प्री-ड्राफ्टेड रेजिग्नेशन लेटर पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर करने से लेकर बाउंसरों की भर्ती तक, बर्खाश्त किए गए कर्मचारियों ने कहा कि कंपनी ने उनका फायदा उठाया और उनके साथ गलत व्यवहार किया.  हालांकि, बायजू ने आरोपों को “निहित स्वार्थों के लिए फैलाए गए निराधार आरोप” के रूप में खारिज कर दिया है. 

कल, बायजू ने केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और कंपनी के संस्थापक और सीईओ बायजू रवींद्रन के बीच एक बैठक के बाद 140 कर्मचारियों की छंटनी और तिरुवनंतपुरम में अपना संचालन बंद करने के अपने फैसले को रद्द कर दिया. 

अपने आधिकारिक बयान में बायजू ने कहा, “केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन और बायजू के संस्थापक बायजू रवींद्रन के बीच एक विस्तृत चर्चा के बाद, हमने अपने टीवीएम (तिरुवनंतपुरम) उत्पाद विकास केंद्र के संचालन को जारी रखने का फैसला लिया है.”

जबकि बायजू का कहना है कि हालिया छंटनी का उद्देश्य अतिरेक से बचना है और वे जिस संख्या को देख रहे हैं वह लगभग 2,500 है. हालांकि, एनडीटीवी ने पाया है कि यह दावा सच्चाई से बहुत दूर है. 

कंपनी के कुछ कर्मचारियों के एनडीटीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत में दावा किया कि 

फायरिंग का सिलसिला इस साल जून में शुरू हुआ था, जब 3,000 कर्मचारियों की नौकरी चली गई थी. तब से अब तक ये सिलसिला जारी है. 

नीलू देबनाथ और उनके पति राजेश (बदले हुए नाम) इसी साल बाइजू में काम करने के लिए बेंगलुरु शिफ्ट हुए थे. लेकिन दिवाली के आसपास दंपति को तब झटका लगा जब दोनों को एक हफ्ते के भीतर इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा. 

देबनाथ ने बाद में कहा : “मुझे कभी यह पूछने का मौका नहीं मिला कि वे मुझे इस्तीफा देने के लिए क्यों मजबूर कर रहे थे. हमारे साथ रोबोट की तरह व्यवहार किया गया. बायजू रवींद्रन का माफीनामा मौजूदा कर्मचारियों को भेजा गया था, लेकिन बर्खास्त कर्मचारियों को नहीं.”

कंपनी से संबंधित अपने कड़वे अनुभव को याद करते हुए, देबनाथ ने आगे कहा कि बर्खास्तगी के दिन, उन्हें बताया गया था कि काम पर उनका आखिरी दिन था और उन्हें बाहर निकलने की प्रक्रिया शुरू करने की जरूरत है.” उसे बताया गया था, ” आज उनका कार्य दिवस है.” उन्होंने बताया कि बर्खास्तगी की पूरी प्रक्रिया जूम पर की गई थी. 

वहीं, उनके पति ने कहा कि उसे कोई नोटिस नहीं दिया गया था और बायजू द्वारा तैयार किए गए एक त्याग पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया था, जिसमें बर्खास्तगी की धमकी दी गई थी और अगर उसने खुद को नहीं छोड़ा तो सेवा के अंत में कोई लाभ नहीं होगा. 

एनडीटीवी के साथ अपने अनुभव को साझा करते हुए, देबनाथ ने कहा: “यदि आप बहस करते हैं, तो कोई मुआवजा नहीं है. यदि आप सहयोग करते हैं, तो आपको एक महीने का वेतन मिलता है. “

उन्होंने आगे कहा कि बायजू ने पहले ही त्याग पत्र का मसौदा तैयार कर लिया था और उन पर कर्मचारियों से हस्ताक्षर करवाए थे. उन्होंने कहा, “हमने पांच साल के लिए सामग्री तैयार की, ताकि वे हमें फायर कर सकें.”

तीन साल पहले फायर किए गए स्टीफेन राज (बदला हुआ नाम) ने कहा उसे लगा जैसे उसके साथ “यूज़-एंड-थ्रो” आइटम की तरह व्यवहार किया गया हो. 

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