Sunday, November 27, 2022

Ravish Kumars Prime Time: For How Long Will Incidents Like Lakhimpur Kheri Keep Happening? – रवीश कुमार का प्राइम टाइम : लखीमपुर खीरी जैसी घटनाएं कब तक घटती रहेंगी?


इस देश में कितने तरीकों से स्त्रियों पर हमले होते हैं उसकी अगर संहिता बनाई जाए तो एक लाख बनने कम पड जाएंगे. सारी हिंसा दो ही बिंदु पर आकर समाप्त हो जाती है कि सरकारी कार्रवाई हुई या नहीं. उसके बाद हिंसा किसी और रूप में कहीं और जारी रहती है. आज आप लखीमपुरखीरी के बारे में चर्चा कर रहे हैं. कल पता नहीं ऐसी भयानक घटना फिर से कहां दोहरा दी जाए. बलात्कार और बलात्कार के बाद हत्या के मामलों को लेकर इस पार्टी की सरकार बनाम उस पार्टी की सरकार की सियासत हो चुकी अपराधियों के मजहब को लेकर सियासत हो चुकी है. मगर लडकियों को खतरों में कोई कमी नहीं आ रही है.

ग्यारह सितंबर की इंडिन एक्स्प्रेस में एक खबर छपी की नोएडा सेक्टर नाइंटी सिक्स की एक ऊंची इमारत से दो बहने कूद गईं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्नीस और सत्रह साल की दो बहने एक निर्माणाधीन इमारत की छत पर चढ़ती हैं और कूद जाती हैं. बड़ी बहन की मौके पर ही मौत हो जाती है. एक्स्प्रेस ने लिखा कि रिश्तेदार शादी के लिए दबाव डाल रहे थे. इस बात को लेकर घर में बहस हुई जिसके बाद दोनों बहनें आधी रात को घर से निकल गईं और एक ग्यारह मंजिला इमारत का चुनाव करती हैं. अपने जीवन को खतरे में डाल देती हैं. हम उस समाज में रहते हैं, जहां अठारह उन्नीस साल की लड़की पर शादी का इतना दबाव है कि वो अपना जीवन समाप्त करने के बारे में सोचने लगती है. महाराष्ट्र और लखीमपुरखीरी से आई खबरों की प्रकृति अलग है मगर दोनों में लाचार और शिकार लडकियां हैं.

महाराष्ट्र में भी एक लड़की के पिता का आरोप है कि उनकी बेटी को तीन लोग मोटर साइकिल से अगवा करके ले गए, उसके साथ बलात्कार किया और हत्या कर दी. उसके शव को पेड़ पर लटका दिया. पुलिस ने आत्महत्या का मामला दर्ज किया है. पिता का आरोप है कि पुलिस ने सभी पहलुओं की जांच नहीं की. पुलिस ने रंजीत ठाकरे,  सुनील और अमर को गिरफ्तार किया है. आजादी के पचहत्तर साल बाद भी एक गरीब आम नागरिक को न्याय के लिए कितना संघर्ष करना पड़ता है. महाराष्ट्र में नंदूरबार के इस आदिवासी पिता से पूछें कि उसकी सत्ताईस साल की बेटी को कुछ लोग अगवा कर ले गए. बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी और शव को पेड़ से लटकाकर खुदकुशी दिखा दिया. हैरानी की बात है कि धरगाँव पुलिस और पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर ने भी केस को खुदकुशी बताकर शव को पिता के हवाले कर दिया. जबकि हत्या के पहले उस बेटी ने परिवार के एक सदस्य को फोन कर आपबीती सुनाई थी और आरोपियों के फोटो भी भेजे थे. पिता सबूत लेकर घूमते और चीखते रहे, लेकिन पुलिस ने एक ना सुनी. लेकिन लड़की के पिता ने हिम्मत नहीं हारी. गांव वालों का भी साथ मिला और फिर सबने मिलकर तय किया कि बेटी का अंतिम संस्कार तब तक नहीं करेंगे जब तक की न्याय नहीं मिल जाता. इससे बाद शव को घर के पास एक गड्ढा खोदकर नमक के साथ काट दिया. पिता ने शव तो सुरक्षित कर लिया लेकिन बड़ा सवाल था कि सरकार तक आवाज कैसे पहुंचाए?

किसी के जरिए ठाणे की सामाजिक कार्यकर्ता परणिता पोंछे से संपर्क हुआ. उसने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और मरने से पहले बेटी के भेजे आरोपियों की फोटो देखने के बाद उसका अध्ययन किया. मामले में लीपापोती की बात साफ नजर आ रही थी इसलिए वो सीधे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मिली और सब कुछ बताया. वो बात सीएम साहब से मिलके पूरे जो पेपर हैं उनको मैंने सौंप दी है और मैंने उनको बोला कि सर आप इसमें पर्सनली ध्यान मामले में न्याय दिलाएं. इस बॉडी का अभी तक अंतिम संस्कार नहीं हुआ है. इमीडिएट सीएम ने उनको फोन लगाया और उन्होंने सीधा बोल दिया कि एक महीने तक अगर बॉडी वैसे के वैसे पड़ी है तो आप थोड़ा ध्यान दो. अगर उनकी मांग है कि दोबारा पोस्टमॉर्टम किया जाए तो आप दूसरा डॉक्टर बुला के पोस्टमॉर्टम करके उनका जो भी प्रॉब्लम है वो सॉल्व कर दो. इसके बाद भी पुलिस वाले पीड़ित परिवार और गांव वालों को इधर से उधर दौड़ाते रहे. मीडिया के सहारे जब मामला उछला तब पुलिस हरकत में आई और एफआईआर में बलात्कार और हत्या की धाराएं जोड़ तीन आरोपियों रंजीत ठाकरे,  सुनील बाल भी और अमर बाली को गिरफ्तार कर लिया.

परिवार की मांग पर अब शव मुंबई के जेजे पोस्टमॉर्टम सेंटर लाया गया है. विधान परिषद के उपसभापति नीलम गोरे ने भी परिवार से मिलकर न्याय का भरोसा दिलाया है. मैं तो गृहमंत्री अमित शाह को ये विनंती करुँगा कि पूरे हिंदुस्तान में त्रि सॅान्ग की जानकारी हर पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर के साथ- साथ जो मेडिकल रिपोर्ट करते हैं उन डॉक्टर को भी मालूम होना बहुत जरूरी है. वहां पे लेडी डॉक्टर भी नहीं है. महाराष्ट्र में आरोपियों के नाम रंजीत, अमर और सुनील हैं. लखीमपुरखीरी में आरोपियों के नाम जुनैद सोहेल हाफिजुल करीमुद्दीन हैं और एक छोटू भी है. रंजीत और अमर पर कोई जोर नहीं मगर जुनैद और सोहेल पर जोर होना ही था. जब बिलकिस बानो के साथ बलात्कार करने वाले दोषियों को माला पहनाया गया तब वे मंत्री बोल नहीं सके की ये गलत है. ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए की पीढ़ियों तक की आत्मा कांपती रहे. गोदी मीडिया भी उस वक्त चुप रह गया और समाज भी. कुल मिलाकर इस राजनीति में निशाने पर हमेशा औरतें रहती हैं. लडकियों की जान जाती रहती है. इस राजनीति से साफ है कि किसी को लड़की के साथ क्या हुआ उस से मतलब नहीं.

अपराधी का समुदाय एक बार अपने हिसाब का निकल आना चाहिए तो फिर राजनीति में बड़े- बड़े आक्रामक बयानों की बाहर आ जाती है. लखीमपुर खीरी की घटना भी भयावह है. बुधवार को दो बेटियों की मां ने आरोप लगाया कि उनकी आंखों के सामने मोटर साइकिल से ही बेटियों को अगवा कर ले जाया गया. बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई और शव को पेड़ से लटका दिया गया. लेकिन जब पुलिस ने आरोपियों के नाम लिए तब पिता का बयान आया कि उन्होंने ना तो आरोपियों को देखा है ना वे पहचानते हैं. पुलिस की जांच को लेकर भी पिता बहुत देर तक सवाल करते रहे. बारह घंटों के भीतर छह गिरफ्तारियां पंद्रह और सत्रह साल की इन दो लड़कियों के शव बुधवार को लखीमपुर जिले के उनके गांव के पास के एक पेड़ से लटके मिले थे. दोनों बहनें हैं और अनुसूचित जाति से आती हैं.

परिवार का आरोप है कि इन दोनों को अगवा किया गया और फिर बलात्कार के बाद मार दिया गया. पुलिस ने एक बयान में दावा किया है कि कुल छह आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं. इनमें से पांच का नाम सुहेल,  जुनैद,  हफीजुर्रहमान,  करीमुद्दीन और आरिफ है. लिस का कहना है कि एक छठा आरोपी जिसका नाम छोटू है, लड़कियों का परिचित था और उसी ने कथित तौर पर लड़कियों को बाकी आरोपियों से मिलाया था. सुहैल और जुनैद लड़कियों को गन्ने के खेत में ले गए. उन्होंने रेप किया और फिर उनका गला घोट दिया. बाकी लोगों ने सबूत मिटाने और लड़कियों को पेड़ पर लटकाने में मदद की ताकि ये खुदखुशी लगे. उत्तर प्रदेश पुलिस का ये कहना है कि जो विक्टिम के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट है उससे भी यही साबित होता है कि पहले इन लड़कियों का बलात्कार किया गया, उसके बाद उनकी गला घोटकर हत्या की गई और उनको पेड़ पर लटका दिया गया. लेकिन पीड़ितों का परिवार पाल इसके कुछ दावों को गलत बता रहा है. पुलिस के मुताबिक लड़कियां अपनी मर्जी से आरोपियों के साथ बाइक पर गईं.

परिवार का कहना है कि उनको अगवा किया गया. पुलिस के मुताबिक लडकियां और कम से कम चार आरोपी दोस्त थे. परिवार का कहना है कि उन्हें दोस्ती की कोई खबर नहीं. हमने संवेदनशीलता के साथ केस को संभालने की कोशिश की है और परिवार को हमसे कोई समस्या नहीं आई. ठीक ऐसे ही छानबीन होनी चाहिए. हो सकता है इसमें और भी लोग या दूसरे भी लोग हों जिनका नाम ना लिया जा रहा हो. तीन लोगों को इनकी जो है हमारी बुआ जी जो हैं उनकी पत्नी जो है वो पहचानती हैं, लेकिन जो दो ना मतलब जो है आया निकल कर के वो कौन है? तो हो सकता है और भी नाम हो जो ना लिए जा रहे हों. पुलिस जो बता रही है क्या आप उस बात से इत्तेफाक रखते हैं. पुलिस का कहना है कि उनकी दोस्ती थी उन लड़कों से इसके इसके कुछ तथ्य रहे होंगे. सबसे पहले गांव मोहल्ले में परिवार को पता चलता है कि ऐसे ऐसे तथ्य, प्रशासन, शासन को तो बाद में पता चलेगी, तो इसके तथ्य होंगे तो हमें भी मिलना चाहिए. जिससे हमें भी तो पता चले कि हमारे घर के तथ्य भारतीय राज्य की बीजेपी सरकार को विपक्ष के तीखे सवाल झेलने पड़े. जो सरकार ने दावा किया कि दोषियों को वो सजा मिलेगी कि उनकी पीढ़ियां कांपेंगी, विपक्ष से कानून व्यवस्था का संकट बता रहा है. कोई लखीमपुर है जहां पहले किसानों पे गाड़ी चढ़ा दी जाती है और मंत्री को बाहर कर दिया जाता है.

पहले तो मंत्री को जेल ही नहीं भेज रहे होते हैं,  पूरी सरकार बचा रही होती है. आज उसी लखीमपुर में दो बच्चों की शॉपिंग हुई,  हत्या हुई, रेप के भी आरोप बता रहे हैं. क्या वहां के मुख्यमंत्री सबसे पहले कार्रवाई करेंगे. इमीडिएट उनको सजा होनी चाहिए. इस प्रकरण में पूरी तरह से सरकार इन पर ऐसी कार्रवाई कठोर करेगी कि आने वाली पीढ़ियों की रूह कांपेगी इन अभियुक्तों की और पूरी तरह से सरकार पीड़ित परिवार के साथ है. हर स्थिति में उनको न्याय मिलेगा. पूरे प्रकरण को हम कोर्ट जाएंगे और शीघ्र सजा दिलाएंगे. बच्ची के विपक्ष के वो आप जानते हैं कि जब उनकी सरकार थी तो उस समय की घटनाओं को उन्हें याद करना चाहिए. हमारी सरकार ऐसी सभी घटनाओं को गंभीरता से लेती है. हो सकता है कि आप नियम कानून छोड़ देंगे. पूरा और उसके बाद आप सही काम भी नहीं हूँ.

बुधवार रात को पुलिस को नाराज गांव वालों के प्रदर्शन को झेलना पड़ा. वो पोस्टमॉर्टम के लिए लड़कियों का शव लेने उनके घर गए थे. इस विडियो में लखीमपुर के पुलिस प्रमुख संजीव सुमन को प्रदर्शनकारियों से रास्ता खाली करने की अपील करते सुना जा रहा है. पूरे समाज के साथ हम लोग है ना पूरा समाज चाहेंगे. हम लोग लेके जाएंगे. मेरी जिम्मेदारी है जिस गाड़ी में जाएंगे मेरी जिम्मेदारी है. लखीमपुर के केस में दो हजार चौदह के एक इंसिडेंट की याद दिला दी जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बदायूं में हुआ था जब दो कजिन सिस्टर की बड़ी एक पेड़ से लटकी पाई गई थी लखीमपुर में राजेश गुप्ता, विनीत कुमार और प्रतीक श्रीवास्तव के साथ आलोक पांडेय एनडीटीवी इंडिया सितम्बर दो हजार बीस में लखीमपुरखीरी में ही अनुसूचित जाति की चौदह साल की एक लड़की की लाश पेड़ से लटकती मिली थी. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार लड़की छत पर सो रही थी वहाँ से गायब हो गई. बाद में पिता ने पास के कमरे से आवाज सुनी तो वहां गए देखा कि उनकी बेटी का शव लटक रहा है. उसी साल सोलह अगस्त की खबर है की दो बच्चियों के साथ बलात्कार की घटना सामने आई. बलात्कार के बाद पीड़िता की आँखें निकाल ली गईं,  जीभ काट ली गई. मगर नवभारत टाइम्स ने लिखा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में साबित नहीं हुआ. लड़कियों को उठाकर ले जाना.  बलात्कार और हत्या की घटनाएं कोई दिन ऐसा गुजरता नहीं जब ऐसी घटना कहीं नहीं होती अब बढ़ते हैं.

दूसरी खबर पर गुजरात और महाराष्ट्र के बीच एक प्रजेक्ट को लेकर राजनीति हो रही है बल्कि महाराष्ट्र के भीतर राजनीति हो रही है क्योंकि अब यही बच्चा है जो प्रजेक्ट महाराष्ट्र में आना था वो गुजरात जा चुका है. प्रधानमंत्री ने भी ट्वीट कर वेदांता फॉक्स कौन के प्रजेक्ट का एक तरह से गुजरात में स्वागत कर दिया है. अब केवल टाइम पास हो रहा है और कहा जा रहा है कि आइसक्रीम नहीं मिली, कोई बात नहीं. मार्किट में लड्डुओं की कमी नहीं. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने प्रजेक्ट को लेकर प्रधानमंत्री से बात की है. उन पर राज्य का विपक्ष आरोप लगा रहा है कि जिस प्रजेक्ट से दो लाख रोजगार आने वाला है उसे गुजरात कैसे जाने दिया गया. मुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि केंद्र की तरफ से भरोसा दिलाया गया है कि और भी बडे प्रजेक्ट आएगे.

सत्ताईस जुलाई को योगेश नाई की ये खबर कह रही है कि वेदांता फॉक्स कौन का संयुक्त उपक्रम महाराष्ट्र में लगने वाला है. इसका फैसला हो गया है. बाईस अरब डॉलर का निवेश होगा. इस खबर में लिखा है कि महाराष्ट्र के अतिरिक्त मुख्य सचिव बलदेव सिंह ने बताया है कि हम बुधवार को कैबिनेट में प्रस्ताव लाने जा रहे हैं. इससे राज्य में डेढ लाख करोड़ से ज्यादा का निवेश आएगा. राज्य सरकार के औद्योगिक विकास निगम ने एक प्रेस नोट जारी कर कहा कि वेदांता कंडक्टर चिप बनाने के लिए महाराष्ट्र सरकार से बातचीत कर रही है. पुणे के तालेगांव में यह प्रजेक्ट लगने वाला है. इससे दो लाख लोगों को रोजगार मिलेगा. परोक्ष और प्रत्यक्ष रूप से एक फॅसने लिखा है कि सत्ताईस जुलाई को वेदांता इलेक्ट्रॉनिक्स और फॉक्स कौन के प्रतिनिधि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मंत्रालय में मिले थे. जिस दिन महाराष्ट्र में ये ऐलान होता है उसी दिन गुजरात में सेमीकंडक्टर के उत्पादन को लेकर सोलह पन्नों की नीति जारी होती है. इसमें लिखा है कि इस प्रोजेक्ट के लिए जो जमीन अधिग्रहित की जाएगी उस पर पचहत्तर प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी. राज्य सरकार देगी या सब्सिडी पहले दो सौ एकड़ जमीन पर मिलने वाली है. पांच साल तक बारह रुपए प्रति क्यूबिक मीटर के हिसाब से पानी दिया जाएगा.

बिजली के बिल में भी भारी सब्सिडी दी जाएगी. बिजली की खपत पर दस साल तक दो रुपए प्रति यूनिट की सब्सिडी दी जाएगी. आम आदमी को जब सस्ती बिजली दी जाती है तब रेवडी के नाम से बहस चलाई जाती है. कहा जाता है कि पवर सेक्टर बैठ जाएगा, लेकिन दस साल तक एक इंडस्ट्री को दो रुपए प्रति यूनिट सब्सिडी बिजली देने का वादा कर दिया जाता है. क्या ये रेवडी नहीं है?  गुजरात और सरकार की नीति के दस दस्तावेजों को पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि इस इंडस्ट्री को लाने के लिए राज्य सरकारें कितना कुछ दे रही है. बस उससे कोई रेवडी नहीं कहेगा. रीफॉर्म कहेगा इस खबर की डिटेल में जाइए. मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का बयान छपा है कि उनकी सरकार को आए डेढ महीने हुए हैं. जैसे ही हम सत्ता में आए हमने फॉक्स कौन और वेदांता के साथ बैठ के कि उन्हें उनतालीस हजार करोड की सब्सिडी देने का प्रस्ताव दिया. ऐसे प्रोजेक्ट एक या दो महीने में हाथ से नहीं निकलते. कंपनी ने अपना इरादा पहले ही कर लिया होगा. सोचा होगा कि महाराष्ट्र सरकार मदद नहीं करेगी. अब उन्होंने गुजरात के साथ करार कर लिया है. महाराष्ट्र उनतालीस हजार करोड़ की सब्सिडी देने की बात कर रहा है. गुजरात दो सौ एकड़ की जमीन के अधिग्रहण पर पचहत्तर प्रतिशत की सब्सिडी दे रहा है.

सेमीकंडक्टर से ही बनती है जिसका इस्तेमाल सुरक्षा उपकरणों से लेकर ऑटम टिक कहाँ और अन्य कई चीजों में होता है, लेकिन क्या गरीब का जीवन अहम नहीं?  अगर उसके लिए बिजली और अनाज पर चालीस हजार करोड की कोई सरकार सबसिडी देती है तो कहा जाता है कि इससे अर्थव्यवस्था बैठ जाएगी. गरीबों की सब्सिडी को रेवडी कहेंगे तो फिर एक कंपनी को चालीस हजार करोड की सब्सिडी दी जा रही है. उसे आप क्या कहना चाहते हैं? अभिषेक की ये रिपोर्ट देखिये शिवसेना के उद्धव गुट और एनसीपी को मौका मिल गया. पोस्टर और नारे लगाकर देवेंद्र फडणवीस और एक ना शिंदे को महाराष्ट्र विरोधी बता रहे हैं. गुस्सा इसलिए फट रहा है क्योंकि वेदांता फॉक्स फोन की फैक्ट्री अब गुजरात शिफ्ट हो गई है. आंदोलन आज सरकार की तरफ से रोकने का काम किया गया है. युवकों का आवाज दबाने का काम महाराष्ट्र की सरकार कर रहे मगर इसके खिलाफ आवाज उठाएंगे. फॉक्स कॉन का जाना इसलिए भी बडी खबर है क्योंकि कुछ दिन पहले ही राज्य की सरकार ने ऐसा दावा किया था की तैयारियां पूरी हो चुकी है. पुणे के तलेगांव में ग्यारह सौ एकड जमीन की तलाशी भी पूरी की जा चुकी थी. सर्वे के काम आगे बढ़ रहे थे. पुणे की राजनीति में सक्रिय पवार परिवार इस मामले को राज्य के रोजगार के नुकसान से जोड़ रहा है.

तीन लाख नौकरियां, करीब तीन लाख नौकरी और उससे जुडे अन्य काम इस व्यापार में थे. करीब दो लाख करोड रुपए इसमें निवेश होने वाले थे और महत्वपूर्ण बात यह है कि बड़े तौर पर महाराष्ट्र को मिलने वाला था. अगर ये परियोजना लागू होती तो करीब तीस हजार करोड रुपए का सरकार को मिल सकता था. इस परियोजना की वजह से महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ने वाली थी. उसे कहीं ना कहीं अब रुकावट आई है. मोटा ब्रेक बस महाराष्ट्र में पूरा विपक्ष मिलकर इसे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की गुजरात के सामने हार के तौर पर दिखा रहा है. बहुत सारे अच्छे प्रकल्प जो महाराष्ट्र के लिए थे वो गुजरात जा रहे हैं. हमारे सरकार जो है वो गुजरात के लिए काम कर रहा है. ऐसा लोगों को अभी लगता है कि सरकार की गलती है. ये नई सरकार जो आए विपक्ष के भारी दबाव के बीच देवेंद्र फडणवीस ने पांच फॉर वेदांता के जाने पर दुख तो मनाया लेकिन पिछली सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया.

देवेंद्र फडणवीस ये सब उस वक्त कर रहे है जब खुद वेदांता के अनिल अग्रवाल रिकॉर्ड पर ये कह चुके हैं कि महाराष्ट्र सरकार ने सब्सिडी का बडा ऑफर दिया था. सवाल ये उठ रहा है कि वेदांता फॉक्स कौन को गुजरात में ऐसा क्या मिल रहा है जो महाराष्ट्र सरकार नहीं दे पा रही थी. इसको लेकर अभी सफाई आना बाकी है, लेकिन वेदांता कहने लगवाल बार बार ये कह रहे हैं कि ये फैसला एक फॅमिली है और इसका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कोई लेना देना नहीं है. आप किसी भी हालत में ये मत समझिए कि मोदी जी ने इसको क्या है ये हमारी डिपॅाजिट. ऐसी ने तय किया कि गुजराती एक ऐसा देश जगह है जिसने सिलिकॉन पॉलिसी सबसे पहले निकली. महाराष्ट्र में सरकार कटघरे में है और इस सब के बीच खबर है कि मुख्यमंत्री इतना शिंदे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की है. उन्हें भरोसा दिलाया गया है कि जल्द ही ऐसे बडे प्रजेक्ट जिनसे रोजगार बढ़ेगा वो महाराष्ट्र को मिलेंगे. पुरानी खबरों को पलटने से पता चलता है कि महाराष्ट्र ने इस कंपनी को अपने राज्य में लाने का प्रयास किया था. सात साल पहले जब महाराष्ट्र में बीजेपी शिवसेना की सरकार थी,  देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री थे तब फॉक्स कौन ने राज्य में निवेश का ऐलान किया था?  या चौदह मई दो हजार पंद्रह का ट्वीट है जिसे देवेंद्र फडणवीस ने ही किया है. इसमें वे लिखते हैं कि फॉक्स कौन कंपनी के संस्थापक एरिको और उनकी टीम के साथ अच्छी मीटिंग कि फडणवीस चीन की यात्रा पर गए थे. अपने ट्वीट में लिखते हैं कि जानकर खुशी हुई कि फॉक्स वन कंपनी महाराष्ट्र में डॉक्टर मोबाइल फोन ऍन बनाने के लिए निवेश करना चाहती है. इन तस्वीरों को फडणवीस अगस्त दो हजार पंद्रह में भी ट्वीट करते हैं. ये ट्वीट आठ अगस्त दो हजार पंद्रह का है.

इसमें कई तस्वीरें तत्कालीन मुख्यमंत्री फडणवीस चीन में है और फॅार खडे हैं. लिखते हैं कि आज मंत्रियों के समूह और फॉक्स कौन ने राज्य और देश के विकास नए अध्याय की शुरुआत की है. इस से संबंधित कुछ दिनों के बाद एक खबर सत्ताईस अक्टूबर दो हजार सत्रह को छपती है की देवेंद्र फडणवीस ही कह रहे हैं कि चीन और भारत को लेकर जो विवाद चल रहा है उससे फॉक्स कंडील में देरी हो गई है. अगस्त दो हजार पंद्रह में जब डील हुई तब दावा किया गया की कंपनी राज्य में पाँच अरब डॉलर का निवेश करेगी. इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि अब प्रजेक्ट आज तक शुरू नहीं हुआ. इस बार जैसे ही खबर आई कि फॉक्स कौन ने वेदांता के साथ हाथ हाथ मिलाया,  गुजरात में प्लांट लगाने का फैसला किया, रोना धोना शुरू हो गया. महाराष्ट्र के नेता कहने लगे कि गुजरात से ज्यादा सब्सिडी दे रहे थे उस से और अधिक दे सकते थे. जो खबरें छपी है उसी में कहा गया है कि गुजरात में सात सौ एकड़ जमीन का सर्वे हो रहा है. खबरें तो ये भी छपी है कि शिंदे सरकार के बनने के पहले ही वेदांता और गुजरात सरकार की बातचीत आगे बढ़ चुकी थी.

गुजरात के अखबारों में इस प्रजेक्ट को लेकर अलग तरह की खबरें संदेश ने लिखा है कि गुजरात में यह प्रोजेक्ट महाराष्ट्र,  तेलंगाना और कर्नाटक को पीछे छोड़ते हुए हासिल किया है. चौदह सितंबर के संदेश में प्रधानमंत्री मोदी का बयान छपा है कि गुजरात में सेमीकंडक्टर प्रजेक्ट से अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा. प्रधानमंत्री ने इसे लेकर ट्वीट भी किया है. गुजरात समाचार ने लिखा है कि वेदांता फॉक्स कौन काम अपनी राज्य में डेढ लाख करोड़ रुपए का निवेश करेगी. इसके लिए एक हजार एकड़ जमीन की जरूरत पड़ेगी. भास्कर ने लिखा है कि सेमीकंडक्टर की कमी से दुनिया भर में चालीस लाख करोड़ का नुकसान हुआ है अब उसका उत्पादन गुजरात में होगा. शिंदे की सरकार बनने के पहले ही फैसला हो चुका था की ये प्लॉट गुजरात में लगेगा जब कोई प्रोजेक्ट लॉन्च होने वाला होता है तब रोजगार को लेकर बड़े- बड़े दावे कर दिए जाते हैं. हिंदी अखबारों में मोटी मोटी हेडलाइनें छप जाती हैं. सरकार उसके बाद कभी नहीं बताती कि इन दावों की तुलना में कितनों को रोजगार मिला. नौ मार्च दो हजार बीस को उत्तर प्रदेश के रक्षा गलियारे को लेकर एक दावा किया गया की ढाई लाख लोगों को रोजगार मिलेगा. इससे एक साल के भीतर छब्बीस जुलाई दो हजार इक्कीस को राज्यसभा में सरकार ने कहा इससे केवल सोलह हजार सात सौ रोजगार पैदा होंगे. अखबार में छपा ढाई लाख सदन में सरकार ने कहा साढे सोलह हजार गाय को लेकर गोदी मीडिया ने कितना उन्माद फैलाया, लेकिन आज जब गाय और भैंसे खतरनाक बीमारी से जूझ रही है, पशुपालकों की पूंजी बर्बाद हो गई है. हजारों की संख्या में गाय मार रही है और लाखों गाय बीमार है. कोई पूछने वाला नहीं.

गुजरात के कच्छ से शरद ने ये रिपोर्ट भेजी है. कहते हैं देश में लंबी बीमारी की पहली खबर कच्छ से ही आई थी. गुजरात और देश का सबसे बड़ा जिला कच्छ कहते हैं. यहां इंसान से ज्यादा संख्या पशुओं की है. सड़क पर चलते हुए आपको बड़ी तादाद में मवेशी दिख जाएंगे. देश में लंबी बीमारी का सबसे पहला मामला तेईस अप्रैल को यहीं से सामने आया. अगस्त महीने में कच्छ के भुज डंपिंग यार्ड में गाय बैलों के शवों की ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर वाइरल हुई, जिनसे समझ में आया कि लंपी नाम की बीमारी कितनी भयावह रूप ले रही है. कच्छ जिले के पथरी गांव की एक गौशाला में पूरे शरीर पर घाव के निशान लिए. ये सोलह बरस की गाय रानी है. करीब डेढ दो महीने पहले रानी जब गर्भवती थी उसी दौरान वो लंपी की चपेट में आई. रानी ने बछडे को जन्म दिया वो भी लम्बी से ग्रस्त हुआ और दुनिया से चला गया. रानी को किसी तरह बचाया गया. लेकिन रानी के शरीर और थन पर आज भी घाव हैं. रानी ने अभी दोबारा से दूध देना शुरू नहीं किया है. वो पहला बच्चा जब थोड़ा की उसको लंपी था. अच्छा जब हुआ तो उसको भी लंबी हो गया और बच्चा होने से पहले इसको भी था. माँ से बच्चे को लग गया अच्छा अच्छा. बाद में उसको का जवाब दिया उसको भी ऍफ लग गया था. अच्छा गया मतलब क्या लम्बा हो गया? हाँ अच्छा,  अच्छा अच्छा अच्छा तो ओलंपिक की वजह से वो भी मर गया. वो मर गया क्योंकि उसको बच बच रहा था. इस गौशाला के मैनेजर चेतन भाई ने बताया कि गौशाला में गाय, बैल और बच्चे सब मिलाकर दो सौ तिरेसठ मवेशी थे, जिनमें सौ लम्बी के शिकार हुए तीस की जान चली गई. पथरी गाँव के राज और परिवार ने बताया कि उनके पास पचपन गाय थी. पंद्रह लम पी से मर गई गोपालन ही पूरे परिवार की आजीविका का साधन है. एक तरफ गाय मारी तो दूसरी तरफ लम्बी से गाय के दूध देने की क्षमता भी कम हुई. अस्सी लीटर पहले पहले अस्सी लीटर हुआ करता था अच्छा दो टाइम का नाम पिंग के बाद में दो गाय लिया अट्ठाईस हजार का तो मतलब क्या है. हम लोग तो सरकार देखती नहीं. अभी वो हम वो काँग्रेस नहीं कर रहे हैं. सरकार को दिखाना जरूरी है. ये मालदा है. ये मेरे पास काम कर रहा है. मेरे पास रहता है तो आता है. अभी उसकी आठ गाय मर गई.

रामाजी भाई का सोमवार भाई का कम से कम आठ दस तो इसका भी गया.  हाँ, ये बीमारी है तो हम लोग इसके ऊपर काम आते हैं और खाते हैं. नरसी भाई ने ये भी बताया कि सरकार की तरफ से गाय को टिका तो लगा है लेकिन उसका लगना और ना लगना बराबर ही है. टीकाकरण का मतलब क्या है? हम लोग बोला तो क्या बोल दिया महाराज जी उसका पटेल डॉक्टर है. वो एकदम सही डॉक्टर है. हरीश भाई पटेल तो क्या बोला महाराज जी आप इसका टिक्का कोई है नहीं. पहले गेट था तो उसको तीन टाइम देते थे. अभी इसको छह टाइम देते हैं. मतलब लगता नहीं है. अच्छा समझ गए. फिर अभी लगा हुआ है. हां वो तो काम चलाऊ चल रहा था. बोला हमारे पास वो सरकार सरकार की तरफ से सरकार की तरफ से है. मतलब उसके पास कोई आधार नहीं है तो क्या करेगा? कच्छ जिले में आपको शायद ही ऐसा कोई पशुपालक मिले जिसने अपनी गाय लंबी बीमारी में ना कोई हो. सड़क पर ही अपनी गाय ले जाते. हमको बड़ी खाकर गाँव के अनवर मिले. अनवर ने चार गाय और दस उनके बच्चे लंपी में खो दिए जबकि एक गाय अंधी हो गई. बताते हैं कि टीका भी लगवाया लेकिन कोई नहीं हुआ. हम लोग दवाई किया था लेकिन दवाई उसको कुछ काम आती नहीं. टीका लगवाया था. वो काम नहीं आया था. यह टीका कब लगवाया था.

आपने दो महीना पहले दो महीने टीका लगवाया था यानी सितंबर चल रहा है तो आपने जुलाई महीने में लगवाया था. जुलाई में तो काम तो आया नहीं आया उसकी वजह से मर गया और इसका जो रहता है उसमें भी ऐसा फोर कपूर का होता है. दूध भी बंद हो जाता है. दूध लाल आता है,  ऐसा होता है. हालत यह है कि अभी तीस गायें हैं जिनमें से तेरह गाय ही दूध दे रही है. सत्रह लंपी से अब तक नहीं उबरी हालांकि राहत की बात ये है कि पिछले कुछ समय से लंबी का प्रकोप कम हुआ है लेकिन कच्छ में आधिकारिक रूप से करीब दो हजार गाय बैल लम्बी का शिकार हुए बताए गए हैं. जबकि असल आंकडा इससे कहीं ज्यादा माना जा रहा है. तो ये थी ग्राउंड रिपोर्ट देश के सबसे बडे जिले कच्छ से उस कच्छ से जहाँ पर इस बार सबसे पहले लंबी का मामला डिपोर्ट हुआ था. इस बीमारी की वजह से यहाँ पर बहुत सी गायों की जान गई. बहुत नुकसान हुआ, पशुपालकों का लेकिन अच्छी बात यही कही जा सकती है कि बीमारी अभी कंट्रोल में नजर आ रही है.

कच्छ गुजरात से आपने ठाकुर के साथ मैं शरद शर्मा एनडीटीवी इंडिया बलिया की सडकें बेहाल है. प्रदेश सरकार दावा करती है कि उसके राज्य में गड्ढा मुक्त सडकें हैं, लेकिन गड्ढे हैं कि वे कुछ और दावा करने लग गए हैं. बलिया में योगी सरकार के परिवहन मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में ही सड़कों पर गड्ढों की भरमार है. आए दिन वहाँ दुर्घटनाएं होती रहती हैं. ये बात मुख्यमार्ग है. शांति अस्पताल और गौर अस्पताल बड़ा सा घर है. घटना का केंद्र बना हुआ जनपद इसकी लिखित शिकायत नहीं दिया है. तमाम तरीके से अधिकारी अधिकारी को संज्ञान नहीं तमाम गुजर रहे हैं. ये आपके सामने देखिए ये देखिए पलटता हुआ बलिया के लोकल चैनल के पत्रकार अभी इस सडक की हकीकत समझा ही रहे थे. तभी उनके कैमरे में असल हालत कैद हो गई. स्थानीय लोग बता रहे हैं कि ये हादसा एक बानगी है. इस गड्ढे की वजह से कई दुर्घटनाएं हो चुकी है. पंद्रह दिन से कटा हुआ है और हर रोज दस पंद्रह बजे रोज पलटते किसी का पैर टूटता है. किसी का हाथ टूटता है, किसी के चोट लगता है, बच्चे भी उसमें दब जाते हैं.

बहुत तकलीफ होती है,  देखा नहीं जा रहा है. हम लोग स्थानीय लोग हैं. अपनी दुकान वाले जाते हैं, वहाँ इकट्ठा भरते हैं, फिर हो जाता है. एक दिन हुआ ऐसा कि एक लड़का दब गया. उसको हटाया गया. तुरंत हम लोग इकट्ठा भरे हैं. बीते एक महीने से यही हाल है. गड्ढा भरा जाता है और फिर बन जाता है. इसे भी फिलहाल अभी भरा गया है, लेकिन स्थानीय लोगों की शिकायत है कि सूबे के परिवहन राज्यमंत्री का क्षेत्र होने के बाद भी इसकी कोई सुध लेने वाला नहीं. एक दिन में दस क्या एक हिंदी नहीं चार घंटे में दस पलट गई. दो दो मिनट पर पलटती जा रही थी कॅश घटना कितने दिनों से लगभग लगभग पंद्रह बीस दिन से गड्ढा पहले भी था तो बाहर आ गया था. लेकिन फिर गड्ढा हो गया और उसी तरह आदमी जा रहे हैं. उस तरह खडा होता जा रहा है. आपके क्षेत्र के मंत्री भी परिवहन मंत्री है. उनसे कभी आप लोगों ने शिकायत की है. इसकी शिकायत मंत्री, मंत्री, विधायक थे. इसी रास्ते से आते जाते हैं, देखते नहीं है लेकिन कोई इसका सुनवाई नहीं हो रहा है. ऐसे ही डेली का डेली रोज का रोज घटना होता जा रहा है. बलिया में हॉस्पिटल रोड की सडक का भी कुछ यही हाल है और कई और इलाकों की सडकें भी हैं. इस मुद्दे पर जिलाधिकारी ने तो बात करने से मना कर दिया लेकिन पीडब्ल्यूडी के इंजिनियर कहते हैं कि जल्द ही सारे गड्ढे दुरुस्त कर लिए जाएंगे जिसके कारण ही करवा दिया गया है. वो समझता हूँ जिले में और उनको बाहर जाएगा हाँ उसके लिए दुनिया चल रहा है और के कारण हो क्या रहा है हो लेकिन बीते एक महीने से इस अनदेखी की वजह से कई लोग घायल हो चुके हैं.

स्थानीय प्रशासन और इंजीनियरों की लापरवाही की वजह से बने ये गड्ढे ना सरकार के गड्ढा मुक्त होने के दावों को खोखला करती है बल्कि कई लोगों को महीनों तक दर्ज देने वाली तकलीफ दे जाती है और ये तकलीफ तब और ज्यादा बडी होती है जब ये मामला सूबे के परिवहन राज्यमंत्री के क्षेत्र का हो. बलिया से करुणासिंधु के साथ वाराणसी से अजय सिंह ऍम यूपी में जब चुनाव हो रहे थे तब यूक्रेन में फंसे मेडिकल छात्रों को लाने के लिए सरकार के कई मंत्री भेजे गए. प्रधानमंत्री के नारे लगवाए जा रहे थे. खूब प्रचार किया गया. अब उन बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कह दिया है कि यूक्रेन से लौटे छात्रों को भारतीय विश्वविद्यालयों में समायोजित नहीं किया जा सकता. नॅशनल मेडिकल कमिशन कानून में इसकी अनुमति देने का कोई प्रावधान नहीं है. इस तरह की छूट से भारत में मेडिकल शिक्षा के मानकों में बाधा आएगी. कई हजार छात्रों का अब क्या होगा? जो विकल्प सरकार ने बताया है, उन्हें मंजूर है या नहीं, वही जानेंगे, वही अपनी प्रतिक्रिया देंगे, लेकिन सरकार ने अपनी तरफ से जवाब दे दिया है. आप ब्रेक ले लीजिए.

सत्तर साल पहले भारत में विलुप्त हो चूका चीता एक बार फिर भारत के जंगलों में दिखने जा रहा है. नामीबिया से आठ चीजों को भारत लाए जाने की तैयारियां पूरी हो गई है. इनमें पाँच मादा और तीन नर जीते हैं जिन्हें मध्य प्रदेश के कुनो नॅशनल पैक में बसाया जाएगा. इसके लिए कुछ नॅशनल पैर में तैयारियां पूरी कर ली गई है. इन चीजों को एक विशेष विमान से नामिबिया से सीधे भारत लाया जाएगा. रात भर की यात्रा के बाद शनिवार सुबह ये विमान जयपुर में उतरेगा जहां से हेलिकॉप्टरों में चीतों को मध्य प्रदेश के कुनो नॅशनल पैर पहुँचाया जाएगा. लंबी यात्रा के दौरान विमान में चीतों में तनाव ना हो इसके लिए उन्हें पिंजरो में बेहोश कर लाया जाएगा. नामीबिया से लाए गए चीजों को छोडने के बाद दक्षिण अफ्रीका से भी बारह चीतों को भारत लाने की तैयारी है. महाठग सुकेश चंद्रशेखर से जुडे मनी लॉन्डरिंग मामले में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने गुरुवार को अभिनेत्री नोरा फतेही से दोबारा पूछताछ की. इससे पहले कल अभिनेत्री जैकलिन फर्नांडीस से करीब साढे आठ घंटे पूछताछ हो चुकी है. सुकेश चंद्रशेखर जेल में है और उससे करोडो के गिफ्ट लेने के मामले में दोनों से पूछताछ हुई. इस मामले में एक और आरोपी पिंकी ईरानी भी है, जिसके सामने बिठाकर दोनों से पूछताछ की गई. पुलिस के मुताबिक पिंकी ईरानी ने ही जैकलिन फर्नांडीस और नोरा फतेही को सुकेश से मिलवाया था और गिफ्ट दिलवाए थे. पिंकी ईरानी का कहना है कि दोनों अभिनेत्रियों को सुकेश आपराधिक चरित्र की जानकारी थी, जबकि दोनों अभिनेत्रियों ने इससे इनकार किया. हालांकि गिफ्ट लेने की बात उन्होंने कबूल की. इसी केस में कुछ और अभिनेत्रियों को भी दिल्ली पुलिस पूछताछ के लिए बुला सकती है.



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